कांवड़ मेला 2025 में उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं का नया कीर्तिमान रच दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित इस महापर्व में 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को मुफ्त और त्वरित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
खास बात यह है कि भारी भीड़, सीमित संसाधन और मौसम की चुनौतियों के बावजूद न तो कोई संक्रामक बीमारी फैली और न ही कोई बड़ा हादसा हुआ। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि यह सफल मॉडल आने वाले कुंभ मेला 2027 के लिए एक आदर्श ढांचा साबित होगा।
प्रभावी तकनीक और बेहतर समन्वय
कांवड़ यात्रा मार्ग पर 35 अस्थायी मेडिकल कैंप और 5 कंटेनर-आधारित स्थायी केंद्र स्थापित किए गए। सभी कैंप्स को जियो-टैग किया गया और उनमें QR कोड की सुविधा दी गई, ताकि श्रद्धालु नजदीकी स्वास्थ्य सेवा आसानी से खोज सकें।
स्वास्थ्य सेवाओं में तैनाती:
- 45 डॉक्टर,
- 69 फार्मासिस्ट,
- 58 नर्स,
- 108 एंबुलेंस,
इसके अलावा, सभी जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
नीलकंठ मार्ग पर उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं
पौड़ी जिले में 9 मेडिकल रिलीफ पोस्ट्स पर 39,000 से अधिक श्रद्धालुओं का इलाज किया गया। इसके अलावा, लक्ष्मण झूला पीएचसी में 24×7 कंट्रोल रूम संचालित हुआ, जिससे त्वरित निगरानी और मदद संभव हो सकी।
विभागों के बीच मजबूत तालमेल
सीएम धामी ने कहा, “हमारा संकल्प है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ यात्रा का अनुभव मिले।” कांवड़ मेला 2025 में स्वास्थ्य विभाग की यह पहल सेवा, नवाचार और अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह मॉडल देशभर में लागू हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के डिजिटल समन्वय और रियल-टाइम हेल्थकेयर सिस्टम को बड़े आयोजनों में अपनाना भविष्य के लिए जरूरी है।
अंत में, उत्तराखंड सरकार की यह पहल दिखाती है कि सही योजना, तकनीक और टीमवर्क से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
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